रतन टाटा जी के जीवन की पूरी कहानी( biography) in हिंदी ।

 Biography in Hindi of the life of Ratan Tata Ji!

                                        
                

     "  take the stones people throw at you and use them build a monument"


 "  लोगों को आप पर फेंकने वाले पत्थर ले लो और उन्हें एक स्मारक बनाने में उपयोग करो"


दोस्तों हम इंसानों की लाइफ में रेस्पेक्ट यानी सम्मान का बहुत बड़ा महत्व होता है क्योंकि दुनिया का हर इंसान यही चाहता है।
उस समाज में उसका मान सम्मान हो और लोग उनकी इज्जत करें, लेकिन रेस्पेक्ट एक ऐसी चीज होती है, जिसको दौलत दौलत या फिर किसी ताकत के दम पर कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता है।  यह सम्मान इतना नाजुक होता है कि इंसान की सिर्फ एक छोटी सी गलती से यह पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।
और इसीलिए कहा जाता है कि मान सम्मान कमाने  से कई गुना ज्यादा मुश्किल उसको बरकरार रखना होता है ।

तो दोस्तों आज इस आर्टिकल में आपको टाटा कंपनी के पूर्व चेयरमैन और भारत के महान बिजनेसमैन रतन टाटा जी के बारे में बताऊंगी।

यह बात तो भारत में रहने वाला हर एक इंसान जानता है कि रतन टाटा सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं बल्कि एक नेक इंसान भी है क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी खुद से पहले देश ओर देश  के लोगों को रखा है ।

रतन टाटा मुश्किल वक्त के समय जिस तरह से लोगों की मदद के समय लोगों के सामने आते हैं, वह अपने आप में एक मिशाल है।

क्योंकि अब तक के जीवन में वे करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपए भारत की मदद के लिए दान कर चुके हैं और इस तरह लोगों की मदद करना  यह दर्शाता है कि वह कितने अच्छे इंसान  हैं, उनकी पूरी दुनिया में रेस्पेक्ट की जाती है।

अगर रतन टाटा जी चाहे तो आराम से यह भारत के सबसे अमीर इंसान बन सकते हैं बल्कि पूरी दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन सकते हैं क्योंकि शायद ऐसा कोई सेक्टर हो जिसमें टाटा  ना हो।

टाटा tea , टाटा एयरलाइंस, टाटा कार, टाटा नमक, हर जगह जहाँ भी जाएं ।  होटल ताज भी हर जगह Tata son's हैं ।

और 100 से ज्यादा इंडस्ट्रीज है उनकी जो कि पूरी दुनिया में फैली हुई है।

दिलचस्प बात!     



टाटा son's  का 66 % प्रॉफिट सोशल सर्विस में जाता है तो टाटा अपने आप को बहुत बड़ा शो नहीं करते ना ही बड़ी बड़ी इंडस्ट्रीज बनाने में विश्वास करते हैं।  यह देश की तरक्की में विश्वास करते हैं ।

रतन टाटा जी का जीवन परिचय

रतन नवल टाटा (28 दिसंबर 1937, को मुम्बई, जन्मे) टाटा समुह के वर्तमान अध्यक्ष, जो भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक समूह है, जिसकी स्थापना जमशेदजी टाटा ने की और उनके परिवार की पीढियों ने इसका विस्तार किया और इसे दृढ़ बनाया।


रतन टाटा नवल टाटा के बेटे थे, जिन्हें नवाजबाई टाटा ने अपने पति की मृत्यु के बाद दत्तक ले लिया था।  रतन टाटा के माता-पिता नवल और सोनू 1940 के मध्य में अलग-अलग हूए।  अलग होते समय रतन 10 साल के और उनके छोटे भाई सिर्फ 7 साल के ही थे।  उन्हें और उनके छोटे भाई, दोनों को उनकी बड़ी माँ नविबाई टाटा ने बड़ा किया था।  कैंपियन स्कूल, मुम्बई से ही रतन टाटा ने स्कूल जाना शुरू किया और कॉलेजेड स्कूल में ही अपनी माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और जॉन केनौन स्कूल में दाखिल हुए।  उसी वास्तुकला में उन्होंने अपनी बी.एससी की शिक्षा पूरी की।  साथ ही कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से 1962 में संचारण पाठ्यक्रम केएम और 1975 में हार्वर्ड बिज़नस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम का अभ्यास किया।  टाटा अल्फा सिग्मा फाई बन्धुत्वता के सदस्य भी है।  रतन टाटा का ऐसा मानना ​​है कि परोपकारियों को अलग नजरिये से देखा जाना चाहिए।  पहले परोपकारी अपनी संस्था और अस्पतालों का विकास करते थे जबकि अब उन्हें देश का विकास करने की आवश्यकता है।

 सन् 1887 में टाटा एंड संस की स्थापना करने वाले जमशेदजी नुसेरवांजी के बड़े बेटे सर दोराबजी टाटा सन् 1904 में अपने पिता के निधन के बाद कंपनी की कमान संभाली।  लेकिन 1932 में वे भी परलोक सिधार गए।  लेकिन उस समय कंपनी को संभालने वाला कोई नहीं था, क्योंकि सर दोराबजी टाटा की कोई संतान नहीं थी।  इसलिए इस बार कंपनी की कमान उनकी बहन के बड़े बेटे सर नवरोजी सकटवाला को दे दी गयी।

करियर :  


भारत लौटने से पहले रतन ने लॉस एंजिल्स, नोकिया, में जोन्स और एमोंस में कुछ समय कार्य किया।  उन्होंने टाटा ग्रुप के साथ अपने करियर की शुरुआत सन 1961 में की।  पत्रों के दिनों में उन्होंने टाटा स्टील के शॉप फ्लोर पर कार्य किया।  इसके बाद वे टाटा ग्रुप के साथ और कंपनियों के साथ जुड़े।  सन 1971 में उन्हें राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया।  1981 में उन्हें टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष बनाया गया।  सन 1991 में जेआरडी टाटा ने ग्रुप के अध्यक्ष पद को छोड़ दिया और रतन टाटा को अपना उत्तराधिकारी बनाया।

 28 दिसंबर 2012 को वे टाटा समूह के सभी कार्यकारी दायित्व से मुक्त हुए।  उनका स्थान 44 वर्ष साइरस मिस्त्री ने लिया।  हालाँकि टाटा अब सकारात्मक हो गए हैं फिर भी वे काम-काज में लगे हुए हैं।  28 दिसंबर 2012 को वे टाटा समूह के सभी कार्यकारी दायित्व से मुक्त हुए।  उनका स्थान 44 वर्ष साइरस मिस्त्री ने लिया।  हालाँकि टाटा अब रिवाइंड हो गए हैं फिर भी वे काम-काज में लगे हुए हैं।  अभी हाल में ही उन्होंने भारत के इ-कॉमर्स कंपनी ट्रडील में अपना व्यक्तिगत निवेश किया है।  इसके साथ-साथ उन्होंने एक और ई-कॉमर्स कंपनी अर्बन लैडर और चाइनीज़ मोबाइल कंपनी जिओमी में भी निवेश किया है।

 रतन टाटा टाटा ने अपने करियर की शुरुवात टाटा ग्रुप के साथ 1961 में की थी |  इसके लिए सबसे पहले उन्हें जमशेदपुर के टाटा स्टील प्लांट में भेजा गया जहाँ के कारीगरों के साथ मिलकर उन्होंने काम की बारीकिय सीख ली थी |  1971 में उन दिनों वित्तीय संकट से जूझ रही नेल्को कंपनी के डायरेक्टर बने |  1991 में जेआरडी टाटा ने टाटांस के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया और उन्हें सारा कार्यभार सौंप दिया।  1991 में टाटा ग्रुप को सम्भालने के बाद उन्होंने कंपनी को इतना उचाइयो तक पहुंचचाया है जिसे हम अभी तक देख रहे हैं।

 26 मार्च 2008 को उन्होंने एफएम मोटर कंपनी से "जगुआर और लैंडरोवर" खरीदकर उसकी भारत में बिक्री शुरू की |  26 जनवरी 2000 को उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया और इसके बाद 2006 को उन्हें दूसरा बड़ा नागरिक सम्मान "पद्मविभूषण" से भी सम्मानित किया गया।  उन्हें लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से मानद की उपाधि भी दी गयी |  2007 में उन्हें विश्व के 25 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में रखा गया |

प्रतिष्ठा:


 • 2006 के विज्ञान के मानद Drund के संस्थान का पाठ्यक्रम बनाया गया
 • 2005 विज्ञान की मानद Drwarwick विश्वविद्यालय
 • 2005 अंतर्राष्ट्रीय गणमान्य अचीवमेंट अवार्ड
 • 2004 प्रौद्योगिकी के मानद डॉ। एशियन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजीज
 • 2004 उरुग्वे के ओरिएंटल गणराज्य की पलुअरुग्वे की सरकार
 • 2001 बिजनेसिबा के मानद डॉ.ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी
 • 2008 मानद फैलोशिपइंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट
 • 2008 मानद नागरिक लेखासिंगपुर सरकार
 • 2008 साइंस की मानद डॉ। इंडियान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी खड़गपुर
 • 2008 साइंस की मानद Driundian इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजीज मुंबई
 • 2008 लॉ की मानद डॉ .कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
 • 2008 लीडरशिप अवार्डलीडरशिप अवार्ड
 • 2007 परोपकार की कार्नेगी पदक अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए कार्नेगी एंडोमेंट
 • 2012 मानद फैलोइंजीनियरिंग की रॉयल अकादमी
 • 2010 इस वर्ष के बिजनेस लीडरियन पुरस्कार
 • 2014 कानून की मानद डॉन्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, कनाडा
 • 2015 नेवोलिटिज़ की मानद डॉ। क्लेमासन विश्वविद्यालय

   रतन टाटा जी के सपनों का घर

                                               


 दिसंबर, 2012 में टाटा ग्रुप से रिटायर होने के बाद रतन टाटा अपना ज्यादातर वक्त कोलाबा स्थित अपने बंगले में बिताते हैं। इस खूबसूरत बंगले को रतन टाटा ने अपने रिटायरमेंट के एक साल पहले खुद अपनी जरूरतों के मुताबिक डिजाइन करवाया था। - यह बंगला कोलाबा पोस्ट ऑफिस के ठीक पीछे स्थित है।

सम्पत्ति 

न टाटा शुद्ध मूल्य: रतन टाटा भारत देश के जाने माने उद्योगपति है जिनकी 100 से भी ज्यादा कंपनिया है जो पूरे 150 से भी ज्यादा देशों में फैली हुई है इन कारण से रतन टाटा को इनकम भी बहुत ज्यादा होती है और अब तक उनकी पुरी है।  ।  कमाई रतन तात का कुल मूल्य 7,350 करोड़ रुपये है।



               लव लाइफ

                                                  




उन्होंने बिजनेस की फील्ड में तो जो चाहा उसने किया।  लेकिन एक जगह ऐसी भी थी जहां वह फेल साबित हुई थी।  हम बात कर रहे हैं रतन टाटा की शादी और उनके प्यार की।  रतन टाटा ने खुद एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया कि उन्हें व्हाट्स लव से प्यार है और जो कौन सी वजह थी जिसके कारण उन्होंने शादी नहीं की।  रतन टाटा को चार बार हुआ था प्यार

रतन टाटा ने इंटरव्यू सीएनएन इंटरनेशनल के टॉश एशिया कार्यक्रम में दिया।  जिसमें उन्होंने कहा कि मुझे अपनी लाइफ में 4 बार प्यार हुआ।  लेकिन लगभग बार हालात ऐसे बने कि किसी न किसी कारण से सिर पर सेहरा बंधे-बंधे रह गए।  उन्होंने आगे कहा कि अच्छी बात यह है कि शादी नहीं हुई है।  क्योंकि होता है तो हालात बहुत कठिन हो जाते हैं। 



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